प्रेग्नेंसी लगभग 280 दिन (40 हफ़्ते) चलती है, जो आख़िरी पीरियड के पहले दिन (LMP) से गिनी जाती है, गर्भधारण के दिन से नहीं। डॉक्टर इसी तरह आपकी डिलीवरी की अनुमानित तारीख़ (EDD) निकालते हैं। इस तरीके को नेगेले का नियम कहते हैं।
ड्यू डेट एक अनुमान है। बहुत कम बच्चे ठीक इसी दिन पैदा होते हैं; ज़्यादातर 37 से 42 हफ़्ते के बीच आते हैं। शुरुआती अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टर तारीख़ बदल भी सकते हैं।
ड्यू डेट कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- चुनें कि किस आधार पर निकालना है: आख़िरी पीरियड, गर्भधारण की तारीख़ या IVF एम्ब्रियो ट्रांसफ़र।
- तारीख़ डालें।
- आख़िरी पीरियड से निकाल रही हैं तो अपने चक्र की आम लंबाई डालें (पक्का न पता हो तो 28 दिन)।
आपको ड्यू डेट, आज कितने हफ़्ते हुए, तिमाही, बचे दिन और गर्भधारण की संभावित तारीख़ दिखेगी। नतीजे के नीचे की टेबल में हर तिमाही की शुरुआत जैसी अहम तारीख़ें हैं।
ड्यू डेट कैसे निकलती है
आख़िरी पीरियड से: ड्यू डेट = LMP + 280 दिन + (चक्र की लंबाई − 28 दिन)
गर्भधारण से: ड्यू डेट = गर्भधारण की तारीख़ + 266 दिन
IVF, 3-दिन का एम्ब्रियो: ड्यू डेट = ट्रांसफ़र की तारीख़ + 263 दिन
IVF, 5-दिन का एम्ब्रियो: ड्यू डेट = ट्रांसफ़र की तारीख़ + 261 दिन
लंबे चक्र में आम तौर पर ओव्यूलेशन देर से होता है, इसलिए ड्यू डेट भी उतने ही दिन आगे खिसक जाती है।
उदाहरण
आपका आख़िरी पीरियड 1 मार्च 2026 को शुरू हुआ और चक्र 28 दिन का है।
- ड्यू डेट: 1 मार्च 2026 + 280 दिन = रविवार, 6 दिसंबर 2026
- गर्भधारण की संभावित तारीख़: लगभग 15 मार्च 2026
- 24 सितंबर 2026 को आप 29 हफ़्ते 4 दिन की प्रेग्नेंट होंगी, यानी तीसरी तिमाही में
32 दिन के चक्र पर ड्यू डेट 4 दिन आगे, 10 दिसंबर 2026 हो जाती है।
तिमाही और टर्म
| पड़ाव | हफ़्ते |
|---|---|
| पहली तिमाही | हफ़्ता 1 से 13 (13 हफ़्ते 6 दिन तक) |
| दूसरी तिमाही | हफ़्ता 14 से 27 |
| तीसरी तिमाही | हफ़्ता 28 से जन्म तक |
| अर्ली टर्म | 37 हफ़्ते 0 दिन से 38 हफ़्ते 6 दिन |
| फ़ुल टर्म | 39 हफ़्ते 0 दिन से 40 हफ़्ते 6 दिन |
| लेट टर्म | 41 हफ़्ते 0 दिन से 41 हफ़्ते 6 दिन |
| पोस्ट-टर्म | 42 हफ़्ते और उसके बाद |
ये परिभाषाएँ स्त्री रोग विशेषज्ञ इस्तेमाल करते हैं। 37 हफ़्ते से पहले पैदा हुए बच्चे को प्रीटर्म (समय से पहले) कहते हैं।
ज़रूरी बातें
- प्रेग्नेंसी का शक होते ही डॉक्टर से मिलें, और जाँच व स्कैन उनके बताए समय पर कराएँ।
- पीरियड अनियमित हों या तारीख़ याद न हो, तो शुरुआती अल्ट्रासाउंड से ज़्यादा भरोसेमंद ड्यू डेट मिलती है।
- यह कैलकुलेटर सिर्फ़ जानकारी के लिए है, डॉक्टरी देखभाल की जगह नहीं ले सकता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ड्यू डेट कितनी सही होती है?
यह एक अनुमान है। ज़्यादातर बच्चे ड्यू डेट से दो हफ़्ते पहले या बाद के बीच पैदा होते हैं। पहली तिमाही का अल्ट्रासाउंड प्रेग्नेंसी की तारीख़ जानने का सबसे सटीक तरीका है, इसलिए डॉक्टर की बताई तारीख़ इससे थोड़ी अलग हो सकती है।
हफ़्ते गर्भधारण से नहीं, आख़िरी पीरियड से क्यों गिने जाते हैं?
गर्भधारण की तारीख़ आम तौर पर पता नहीं होती, लेकिन ज़्यादातर महिलाओं को आख़िरी पीरियड की तारीख़ याद रहती है। इसलिए प्रेग्नेंसी उसी दिन से गिनी जाती है, यानी गर्भधारण के समय आप पहले से लगभग 2 हफ़्ते "प्रेग्नेंट" मानी जाती हैं।
स्कैन में ड्यू डेट अलग आई है। कौन-सी सही है?
डॉक्टर की बात मानें। अगर शुरुआती स्कैन की तारीख़ पीरियड वाली तारीख़ से काफ़ी अलग हो, तो डॉक्टर आम तौर पर स्कैन वाली तारीख़ मानते हैं।
पीरियड अनियमित हों तो क्या यह काम करेगा?
नतीजा कम सटीक होगा। गर्भधारण या IVF ट्रांसफ़र की तारीख़ पता हो तो वह विकल्प चुनें। वरना डॉक्टर अल्ट्रासाउंड से प्रेग्नेंसी की तारीख़ तय करेंगे।
फ़ुल-टर्म प्रेग्नेंसी कितने हफ़्ते की होती है?
39 हफ़्ते 0 दिन से 40 हफ़्ते 6 दिन तक प्रेग्नेंसी फ़ुल टर्म मानी जाती है। 37 हफ़्ते से पैदा हुए बच्चे अर्ली टर्म और 37 हफ़्ते से पहले वाले प्रीटर्म कहलाते हैं।