इमरजेंसी फंड वह पैसा है जो सिर्फ़ अचानक आई मुसीबत के लिए अलग रखा जाता है: नौकरी छूटना, इलाज का बिल, घर या गाड़ी की ज़रूरी मरम्मत। यह एक बुरे महीने को क्रेडिट कार्ड के क़र्ज़ या टूटे हुए निवेश में बदलने से रोकता है। लंबे लक्ष्यों के लिए निवेश शुरू करने से पहले यह फंड सबसे पहले बनना चाहिए।
इमरजेंसी फंड कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- अपने हर महीने के ज़रूरी ख़र्च डालें: किराया या EMI, राशन, बिल, स्कूल फ़ीस, बीमा प्रीमियम और लोन का भुगतान। बाहर खाना या घूमना जैसे ख़र्च न जोड़ें, जिन्हें मुसीबत में रोका जा सकता है।
- चुनें कि कितने महीनों का ख़र्च रखना है।
- पहले से जमा इमरजेंसी बचत डालें।
- चुनें कि बाकी रकम कितने महीनों में बनानी है।
कितने महीनों का ख़र्च रखें?
| आपकी स्थिति | कितने महीनों का ख़र्च |
|---|---|
| नौकरीपेशा, स्थिर नौकरी, घर में दो कमाने वाले | 3 – 6 |
| नौकरीपेशा, घर में एक ही कमाने वाला | 6 |
| अपना काम, फ़्रीलांसर या कमीशन वाली आमदनी | 6 – 12 |
| घर में आश्रित माता-पिता या सेहत की चिंता | 9 – 12 |
उदाहरण
आपके ज़रूरी ख़र्च ₹40,000 महीना हैं और आप 6 महीने का इंतज़ाम चाहते हैं। पहले से ₹50,000 जमा हैं और बाकी 12 महीनों में पूरा करना है।
- ज़रूरी इमरजेंसी फंड = 40,000 × 6 = ₹2,40,000
- अभी बचाने हैं = ₹1,90,000
- हर महीने बचाएँ = ₹15,833
इमरजेंसी फंड कहाँ रखें
पैसा सुरक्षित होना चाहिए और एक-दो दिन में मिल जाना चाहिए। सेविंग्स अकाउंट, सेविंग्स से जुड़ी स्वीप-इन FD, या लिक्विड म्यूचुअल फंड अच्छे विकल्प हैं। शेयर, लंबे लॉक-इन वाले प्रोडक्ट, और ऐसी कोई भी चीज़ न चुनें जिसकी क़ीमत ठीक ज़रूरत के समय गिर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कितना इमरजेंसी फंड चाहिए?
ज़्यादातर लोगों को 3 से 6 महीने के ज़रूरी ख़र्च रखने चाहिए। अगर आमदनी अनियमित है या आप अकेले कमाने वाले हैं, तो 6 से 12 महीने का लक्ष्य रखें।
क्या इमरजेंसी फंड से पहले निवेश करना चाहिए?
पहले कम से कम बुनियादी इमरजेंसी फंड बनाएँ। इसके बिना एक ही मुसीबत आपको नुकसान में निवेश बेचने या ऊँचे ब्याज पर क़र्ज़ लेने पर मजबूर कर सकती है।
क्या हेल्थ इंश्योरेंस इमरजेंसी फंड की जगह ले सकता है?
नहीं। हेल्थ इंश्योरेंस अस्पताल के बिल चुकाता है, लेकिन छूटी आमदनी, मरम्मत या दूसरी मुसीबतों का नहीं। दोनों चाहिए।
क्या क्रेडिट कार्ड को इमरजेंसी फंड मान सकते हैं?
यह जोखिम भरा है। पूरा बिल न चुकाने पर क्रेडिट कार्ड का क़र्ज़ सालाना लगभग 40% या उससे ज़्यादा पड़ता है। क्रेडिट कार्ड पेऑफ़ कैलकुलेटर देखें।