फ़्लैट पसंद करने से पहले यह जानना काम आता है कि बैंक आपको कितना बड़ा होम लोन दे सकते हैं। लोन देने वाले मुख्य रूप से देखते हैं कि आपकी मासिक आमदनी का कितना हिस्सा EMI में जा सकता है, जिसे FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) कहते हैं। यह कैलकुलेटर उसी तरीके से आपके लोन, उससे बनने वाली प्रॉपर्टी की क़ीमत और ज़रूरी डाउन पेमेंट का अंदाज़ा लगाता है।
होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- अपनी हर महीने की शुद्ध आमदनी (हाथ में आने वाली सैलरी) डालें। साथ में आवेदन करने वाले (को-एप्लिकेंट) की आमदनी भी जोड़ें।
- कार, पर्सनल या दूसरे लोन की चल रही EMI डालें।
- अनुमानित ब्याज दर और अवधि डालें।
- बैंक आमदनी का कितना हिस्सा सारी EMI के लिए मानता है, वह डालें। कई बैंक 50% मानते हैं, और ज़्यादा आमदनी पर कुछ 60% तक।
एलिजिबिलिटी कैसे निकलती है
नई EMI की अधिकतम सीमा = आमदनी × FOIR − चल रही EMI
मिलने वाला लोन = वह लोन जिसे यह EMI दी गई दर और अवधि में चुका सके
प्रॉपर्टी की क़ीमत = मिलने वाला लोन ÷ लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा
RBI तय करता है कि बैंक प्रॉपर्टी की क़ीमत का कितना हिस्सा लोन दे सकते हैं: ₹30 लाख तक के लोन पर 90% तक, ₹30 लाख से ₹75 लाख तक 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75%। बाकी आपका डाउन पेमेंट है।
उदाहरण
आपकी हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,00,000 महीना है और आप ₹10,000 दूसरी EMI में देते हैं। बैंक आमदनी का 50% EMI के लिए मानता है, 8.5% पर 20 साल के लिए।
- नई EMI की अधिकतम सीमा = 50,000 − 10,000 = ₹40,000
- मिल सकने वाला होम लोन = ₹46,09,234
- कितनी क़ीमत की प्रॉपर्टी (80% LTV) = ₹57,61,542
- ज़रूरी डाउन पेमेंट = ₹11,52,308
अवधि से एलिजिबिलिटी पर असर
वही ₹40,000 EMI, 8.5% पर:
| अवधि | मिलने वाला लोन |
|---|---|
| 15 साल | ₹40,61,988 |
| 20 साल | ₹46,09,234 |
| 25 साल | ₹49,67,543 |
| 30 साल | ₹52,02,146 |
एलिजिबिलिटी कैसे बढ़ाएँ
- आमदनी वाले को-एप्लिकेंट को जोड़ें, जैसे पति/पत्नी या माता-पिता।
- छोटे लोन बंद करें आवेदन से पहले, क्योंकि हर EMI आपकी सीमा घटाती है।
- अच्छा क्रेडिट स्कोर रखें, जिससे कम ब्याज दर भी मिल सकती है।
- लंबी अवधि चुनें, फिर ब्याज बचाने के लिए जब हो सके प्रीपे करें। लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
₹1 लाख सैलरी पर कितना होम लोन मिल सकता है?
बिना दूसरी EMI के, 50% FOIR, 8.5% ब्याज और 20 साल पर लगभग ₹57.6 लाख। चल रही EMI, उम्र, क्रेडिट स्कोर और बैंक के अपने नियम आख़िरी रकम बदल देते हैं।
FOIR क्या है?
यह आपकी मासिक आमदनी का वह हिस्सा है जो सारे लोन की EMI मिलाकर जा सकता है। कई बैंक इसे लगभग 50% पर रखते हैं।
क्या उम्र से होम लोन एलिजिबिलिटी पर असर पड़ता है?
हाँ। ज़्यादातर बैंक चाहते हैं कि लोन लगभग 60 से 65 साल की उम्र तक ख़त्म हो जाए, इसलिए ज़्यादा उम्र वालों को कम अवधि और छोटा लोन मिलता है।
क्या नतीजा पक्का है?
नहीं। यह अंदाज़ा है। बैंक आपका क्रेडिट इतिहास, नौकरी की स्थिरता, प्रॉपर्टी के क़ानूनी काग़ज़ और अपनी नीतियाँ भी देखते हैं।