चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) यानी ब्याज पर ब्याज। हर अवधि में ब्याज आपके मूलधन में जुड़ जाता है, और अगली अवधि का ब्याज इस बड़ी रकम पर लगता है। लंबे समय में इससे पैसा साधारण ब्याज के मुक़ाबले बहुत तेज़ी से बढ़ता है। लोन और क्रेडिट कार्ड के बकाए पर यही चीज़ आपके ख़िलाफ़ काम करती है।
चक्रवृद्धि ब्याज कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- मूल राशि डालें।
- सालाना ब्याज दर डालें।
- अवधि साल में चुनें।
- ब्याज कितनी बार जुड़ता है, वह चुनें: सालाना, छमाही, तिमाही, मासिक या रोज़ाना।
कैलकुलेटर कुल राशि और ब्याज दिखाता है। साल-दर-साल हिसाब में हर साल का ब्याज और साल के अंत का बैलेंस है। ध्यान दें कि हर साल का ब्याज कैसे बढ़ता जाता है।
चक्रवृद्धि ब्याज का फ़ॉर्मूला
A = P × (1 + r ÷ n)^(n × t)
CI = A − P
- A = कुल राशि
- P = मूलधन
- r = सालाना ब्याज दर ÷ 100
- n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (1, 2, 4, 12 या 365)
- t = समय (साल)
उदाहरण
आप ₹1,00,000 8% पर 5 साल के लिए लगाते हैं, सालाना कंपाउंडिंग के साथ।
- A = 1,00,000 × (1.08)^5
- कुल राशि = ₹1,46,933
- चक्रवृद्धि ब्याज = ₹46,933
कंपाउंडिंग कितनी बार हो, इसका असर
₹1,00,000, 8% पर 5 साल:
| ब्याज जुड़ने का तरीका | कुल राशि |
|---|---|
| सालाना | ₹1,46,933 |
| छमाही | ₹1,48,024 |
| तिमाही | ₹1,48,595 |
| मासिक | ₹1,48,985 |
| रोज़ाना | ₹1,49,176 |
चक्रवृद्धि बनाम साधारण ब्याज
₹1,00,000, 8% सालाना, सालाना कंपाउंडिंग:
| साल | साधारण ब्याज | चक्रवृद्धि ब्याज |
|---|---|---|
| 5 | ₹40,000 | ₹46,933 |
| 10 | ₹80,000 | ₹1,15,892 |
| 20 | ₹1,60,000 | ₹3,66,096 |
शुरुआती सालों में फ़र्क छोटा है। 20 साल में चक्रवृद्धि ब्याज साधारण ब्याज से दोगुने से भी ज़्यादा हो जाता है। दूसरी तरफ़ के लिए साधारण ब्याज कैलकुलेटर देखें।
72 का नियम
पैसा कितने साल में दोगुना होगा, यह जानने के लिए 72 को ब्याज दर से भाग दें। 8% पर 72 ÷ 8 = 9 साल। सटीक जवाब 9.01 साल है, यानी यह तरीका काफ़ी सही बैठता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज में क्या फ़र्क है?
साधारण ब्याज सिर्फ़ मूल राशि पर लगता है। चक्रवृद्धि ब्याज मूल राशि और पहले जुड़े ब्याज, दोनों पर लगता है, इसलिए यह तेज़ी से बढ़ता है।
किस कंपाउंडिंग से सबसे ज़्यादा ब्याज मिलता है?
ब्याज जितनी बार जुड़ता है, कुल राशि उतनी ज़्यादा होती है। रोज़ाना कंपाउंडिंग मासिक से थोड़ा ज़्यादा देती है, मासिक तिमाही से ज़्यादा, और इसी तरह। लेकिन दर और समय के असर के मुक़ाबले यह फ़र्क आमतौर पर छोटा होता है।
महीनों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज कैसे निकालें?
महीनों को साल में बदलकर अवधि में डालें। जैसे 18 महीने = 1.5 साल और 6 महीने = 0.5 साल।
भारत में चक्रवृद्धि ब्याज कहाँ लगता है?
बैंक FD (तिमाही), रिकरिंग डिपॉज़िट, PPF (सालाना), सेविंग्स अकाउंट, ज़्यादातर निवेश, और लोन की तरफ़ क्रेडिट कार्ड व बकाया लोन पर।