फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD) भारत में बचत का सबसे लोकप्रिय तरीका है। आप एक तय समय के लिए, तय ब्याज दर पर, बैंक या NBFC में एकमुश्त रकम जमा करते हैं। ज़्यादातर बैंक हर तिमाही ब्याज आपकी जमा में जोड़ देते हैं, जिससे ब्याज पर भी ब्याज मिलने लगता है। यह कैलकुलेटर बताता है कि मैच्योरिटी पर आपको ठीक कितना पैसा मिलेगा।
FD कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- जमा राशि डालें।
- बैंक की सालाना ब्याज दर डालें।
- अवधि साल में चुनें (6 महीने के लिए 0.5, 18 महीने के लिए 1.5 और इसी तरह)।
- ब्याज कितनी बार जुड़ता है, वह चुनें। ज़्यादातर बैंक तिमाही जोड़ते हैं।
कैलकुलेटर मैच्योरिटी राशि और कुल ब्याज दिखाता है। साल-दर-साल हिसाब में हर साल के अंत का बैलेंस दिखता है।
FD का फ़ॉर्मूला
A = P × (1 + r ÷ n)^(n × t)
- A = मैच्योरिटी राशि
- P = जमा राशि
- r = सालाना ब्याज दर ÷ 100
- n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (तिमाही के लिए 4)
- t = अवधि (साल)
उदाहरण
आप ₹1,00,000 5 साल के लिए 7% पर जमा करते हैं, तिमाही कंपाउंडिंग के साथ।
- A = 1,00,000 × (1 + 0.07 ÷ 4)^(4 × 5)
- मैच्योरिटी राशि = ₹1,41,478
- कुल ब्याज = ₹41,478
कंपाउंडिंग का असर
₹1,00,000, 7% पर 5 साल के लिए:
| ब्याज जुड़ने का तरीका | मैच्योरिटी राशि |
|---|---|
| सालाना | ₹1,40,255 |
| छमाही | ₹1,41,060 |
| तिमाही | ₹1,41,478 |
| मासिक | ₹1,41,763 |
ब्याज जितनी बार जुड़ेगा, उतना ज़्यादा मिलेगा, लेकिन फ़र्क छोटा है। ब्याज दर का असर कहीं ज़्यादा है।
FD कराने से पहले ये जान लें
- FD का ब्याज टैक्सेबल है। यह आपकी आमदनी में जुड़ता है और आपके स्लैब रेट पर टैक्स लगता है।
- TDS कट सकता है अगर एक बैंक से साल का ब्याज तय सीमा (₹50,000, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1,00,000) से ज़्यादा हो। अगर आपकी कुल आमदनी टैक्स सीमा से कम है, तो TDS से बचने के लिए Form 121 जमा कर सकते हैं, जिसने अप्रैल 2026 से Form 15G और 15H की जगह ली है। रकम TDS कैलकुलेटर से जाँचें।
- वरिष्ठ नागरिकों को आमतौर पर 0.25% से 0.50% ज़्यादा ब्याज मिलता है।
- FD समय से पहले तोड़ने पर आमतौर पर पेनल्टी लगती है, यानी जितने समय पैसा रहा उस पर कम ब्याज मिलता है।
- जमा बीमा: DICGC हर बैंक में हर जमाकर्ता के ₹5 लाख तक (ब्याज समेत) का बीमा करता है।
- क्यूम्युलेटिव बनाम पेआउट FD: यह कैलकुलेटर क्यूम्युलेटिव FD के लिए है, जिसमें ब्याज वापस जमा में जुड़ता है। पेआउट FD में ब्याज हर महीने या तिमाही आपको मिल जाता है, इसलिए मैच्योरिटी पर सिर्फ़ मूल जमा मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भारत में FD पर ब्याज कैसे निकाला जाता है?
ज़्यादातर बैंक तिमाही कंपाउंडिंग इस्तेमाल करते हैं। हर तीन महीने में ब्याज निकालकर जमा में जोड़ दिया जाता है, और अगली तिमाही का ब्याज इस बढ़ी हुई रकम पर लगता है।
क्या FD का ब्याज टैक्सेबल है?
हाँ। FD का ब्याज "अन्य स्रोतों से आय" के रूप में आपके स्लैब रेट पर पूरी तरह टैक्सेबल है, चाहे वह आपको मिले या दोबारा निवेश हो।
FD मैच्योरिटी से पहले तोड़ने पर क्या होता है?
ज़्यादातर बैंक पेनल्टी के साथ समय से पहले निकासी की इजाज़त देते हैं। आमतौर पर जितने समय पैसा रहा, उस अवधि की दर से 0.5% से 1% कम ब्याज मिलता है। टैक्स सेवर FD को 5 साल के लॉक-इन में नहीं तोड़ा जा सकता।
क्या FD में पैसा सुरक्षित है?
बैंकों में जमा रकम का DICGC हर बैंक में हर जमाकर्ता के ₹5 लाख तक बीमा करता है। इससे ज़्यादा रकम हो तो अलग-अलग बैंकों में बाँट सकते हैं।
FD या RD: कौन सा चुनें?
अगर आपके पास पहले से एकमुश्त रकम है तो FD चुनें। अगर हर महीने तय रकम बचानी है तो रिकरिंग डिपॉज़िट चुनें। RD कैलकुलेटर देखें।