ग्रेच्युटी कैलकुलेटर

अपनी आख़िरी बेसिक सैलरी और नौकरी के सालों से ग्रेच्युटी निकालें, और देखें कि उसमें से कितनी टैक्स-फ़्री है।

₹
साल
महीने

नतीजा

ग्रेच्युटी राशि
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गिने गए साल
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इस्तेमाल हुआ फ़ॉर्मूला
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टैक्स-फ़्री (₹20 लाख तक)
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टैक्सेबल हिस्सा
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पात्रता
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ग्रेच्युटी वह एकमुश्त रकम है जो कंपनी आपको सालों की नौकरी के बाद नौकरी छोड़ने, रिटायर होने या इस्तीफ़ा देने पर देती है। यह लंबी सेवा का इनाम है और क़ानून से तय होती है, इसलिए आप अपनी आख़िरी सैलरी और कंपनी में बिताए सालों से इसे सटीक निकाल सकते हैं।

ग्रेच्युटी कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें

  1. अपनी आख़िरी मासिक बेसिक सैलरी + DA डालें।
  2. नौकरी के साल और अतिरिक्त महीने डालें।
  3. चुनें कि आपकी कंपनी ग्रेच्युटी क़ानून के दायरे में है या नहीं। 10 या ज़्यादा कर्मचारियों वाली ज़्यादातर कंपनियाँ आती हैं।

ग्रेच्युटी का फ़ॉर्मूला

दायरे वाली कंपनियाँ:  ग्रेच्युटी = 15 × आख़िरी सैलरी × साल ÷ 26
दायरे से बाहर:       ग्रेच्युटी = 15 × आख़िरी सैलरी × पूरे साल ÷ 30
  • आख़िरी सैलरी यानी बेसिक पे और महँगाई भत्ता।
  • दायरे वाली कंपनियों में छह महीने से ज़्यादा का हिस्सा पूरा साल गिना जाता है।
  • 15 यानी हर साल के 15 दिन की मज़दूरी, और 26 यानी महीने के कामकाजी दिन।

उदाहरण

आपकी आख़िरी बेसिक + DA ₹50,000 है और आपने दायरे वाली कंपनी में 10 साल 7 महीने काम किया।

  • गिने गए साल = 11 (7 महीने छह से ज़्यादा हैं)
  • ग्रेच्युटी = 15 × 50,000 × 11 ÷ 26 = ₹3,17,308
  • पूरी रकम टैक्स-फ़्री है, क्योंकि यह ₹20 लाख से कम है।

दायरे से बाहर वाली कंपनी में वही नौकरी 10 साल गिनी जाती है: 15 × 50,000 × 10 ÷ 30 = ₹2,50,000।

पात्रता

  • आमतौर पर 5 साल की लगातार नौकरी ज़रूरी है।
  • नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड में फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी 1 साल बाद ही हक़दार हो जाते हैं।
  • मृत्यु या विकलांगता पर नौकरी के सालों की शर्त नहीं है।
  • कंपनी को देय होने के 30 दिन के अंदर भुगतान करना होता है।

ग्रेच्युटी पर टैक्स

  • ग़ैर-सरकारी कर्मचारी: पूरी नौकरी में कुल ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री। बाकी रकम आमदनी की तरह टैक्स होती है।
  • सरकारी कर्मचारी: ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ़्री है।

ग्रेच्युटी क़ानून कंपनी के लिए ज़रूरी भुगतान को भी ₹20 लाख तक सीमित करता है, हालाँकि कंपनियाँ ज़्यादा दे सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ग्रेच्युटी कैसे निकाली जाती है?

दायरे वाली कंपनियों के लिए: 15 × आख़िरी बेसिक + DA × नौकरी के साल ÷ 26। आख़िरी साल में छह महीने से ज़्यादा की नौकरी पूरा साल गिनी जाती है।

क्या 5 साल से पहले ग्रेच्युटी मिलती है?

आमतौर पर नहीं, सिवाय मृत्यु या विकलांगता के। नए लेबर कोड में फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी 1 साल बाद हक़दार हैं।

क्या ग्रेच्युटी टैक्सेबल है?

ग़ैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ़्री है। इससे ज़्यादा रकम आपकी आमदनी में जुड़कर टैक्स होती है।

क्या मेरे CTC में ग्रेच्युटी शामिल है?

कई कंपनियाँ CTC में ग्रेच्युटी को बेसिक के लगभग 4.81% के रूप में दिखाती हैं। यह पात्र होने के बाद नौकरी छोड़ने पर ही मिलती है। सैलरी कैलकुलेटर देखें।